Birthday Special : हारी हुई बाजी जीतने में हैं माहिर, देशभर की इच्छा और आकांक्षा को कश्मीर में लागू करके बने राजनीति के ‘असली चाणक्य’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को यूं ही राजनीति का चाणक्य नहीं कहा जाता. ये बचपन में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ जुड़ गए जिससे देशभक्ति और राजनीति के सबक बहुत ही कम उम्र में इनकी रगों में दौड़ने लगे. जब शाह एक्टिव पॉलिटिक्स में आए तो उन्होंने एक बार नहीं, बल्कि अनगिनत बार यह साबित किया कि उनसे बड़ा देशभक्त और राजनीति का चाणक्य इस समय भारत में कोई दूसरा नहीं है. लंबे समय से नरेंद्र मोदी के साथी रहे शाह की रणनीति की बदौलत ही बीजेपी पहली बार पूर्ण बहुमत में आई और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने. मोदी-शाह की जोड़ी ने ही बीजेपी को बुलंदियों तक पहुंचाया और यह दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनी. शाह के अध्यक्ष रहते देशभर के करीब 3/4 राज्यों में भगवा झंडा लहराया और वहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी.

कांग्रेस की साजिशों को हर बार किया नाकाम

केंद्रीय मंत्री अमित शाह का राजनीतिक करियर जब उफान मार रहा था, तब कांग्रेस ने अनगिनत बार साजिश करके उन्हें कमजोर करने का प्रयास किया. वह कई बार राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजरे भी, लेकिन फिर से ज्यादा ताकतवर होकर सामने आए. गुजरात में सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में भी शाह को फंसाने के लिए कांग्रेस ने कई नापाक साजिशें रचीं लेकिन कभी उनकी देशभक्ति और कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने की ललक को तोड़ नहीं सकी. यही नहीं, जब अमित शाह देश के गृहमंत्री बने तो उन्होंने कांग्रेस द्वारा देश की अखंड़ता के लिए दिए गए जख्म धारा 370 का जड़ से खात्मा कर देश की इच्छा और आकांक्षा को जम्मू-कश्मीर में लागू किया.

ऐसे लिखी गई धारा 370 हटाने की पटकथा

अमित शाह के काम करने का एक तरीका है. वह कभी अपने व्यवहार से यह जाहिर नहीं होने देते कि वह क्या करने वाले हैं. यही बात उनके व्यक्तित्व को अन्य राजनेताओं से अलग बनाती है. 5 अगस्त 2019 का दिन था. अमित शाह सुबह 11 बजे एक टॉप सीक्रेट दस्तावेज के साथ संसद पहुंचे थे लेकिन किसी को पता नहीं था कि वह क्या करने वाले हैं. लेकिन इससे पहले कश्मीर में काफी कुछ बदल चुका था जो एक बड़े बदलाव की आहट दे रहा था. हालांकि यह कुछ भी अचानक नहीं हुआ था. इसकी पटकथा उसी समय लिखी जा चुकी थी जब बीजेपी के लोकसभा चुनाव में 300 से ज्यादा सीटें जीतने के बाद अमित शाह को पीएम नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में देश का गृहमंत्री बनाया गया.

5 अगस्त को अचानक बदल गया कश्मीर का माहौल

कश्मीर से धारा 370 को हटाना कोई आसान काम नहीं था. कांग्रेस के शासन में तो इसे लगभग असंभव करार दिया जा चुका था. यही नहीं, कांग्रेस ने तो यह भी साजिशें की कि कभी जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटे ही नहीं. लेकिन अमित शाह धारा 370 को जड़ से खत्म करने के लिए अपनी रणनीति पर जुटे हुए थे. 5 अगस्त से करीब सप्ताह भर पहले से ही कश्मीर में शाह ने अपनी रणनीति की बिसात बिछानी शुरू कर दी थी. कश्मीर में तुरंत प्रभाव से हजारों सैनिकों की तैनाती की गई और अमरनाथ यात्रा के लिए कश्मीर में मौजूद हज़ारों तीर्थयात्रियों को आतंकी ख़तरे का हवाला देते हुए सुरक्षित अपने घर लौटने के लिए कह दिया गया.

शाह के खास डोभाल ने संभाला था मोर्चा

कश्मीर में अमित शाह के इस खास काम को उनके सबसे भरोसेमंदों में से एक भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अंजाम दिया. धारा 370 हटने से एक महीने पहले से डोभाल ने कई बार कश्मीर का दौरा कर वहां के जमीनी हालात का जायजा लिया. यह बड़ा फैसला होने से पहले उन्होंने वहां की सुरक्षा की स्थिति को भी अपने तरीके से भांप लिया. यही नहीं, शाह ने पीएम मोदी के सबसे विश्वस्त ऑफिसर्स में से एक बीवीआर सुब्रमण्यम को जम्मू-कश्मीर का मुख्य सचिव बनवाया ताकि श्रीनगर से लगातार सही फीडबैक मिलता रहे. इसके अलावा अमित शाह गृह सचिव राजीव गाबा के साथ उन परिस्थितियों के लिए प्रशासनिक स्तर का काम कर रहे थे जो इस घोषणा के बाद उत्पन्न होने वाली थी. क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी सरकार के फैसले के क़ानूनी पक्ष का जिम्मा संभाले हुए थे.

आतंकियों के पालनहारों को करवा दिया था नजरबंद

फारूख अब्दुला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे कई नेता जो धारा-370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकते थे उनको 4 अगस्त की रात को उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया. इस तरह शाह ने अपने रणनीतिक कौशल और अद्वितीय सूझबूझ का परिचय देते हुए 5 अगस्त को संसद में कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का ऐलान करते हुए सालों से लंबित चली आ रही देश की इच्छा और आकांक्षाओं को पूरा कर दिया. इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करते हुए लद्दाख को इससे अलग कर दिया गया.

विकास के नए रास्ते पर निकल पड़ा है जम्मू-कश्मीर

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद अमित शाह ने काफी हद तक वहां आतंक का भी खात्मा कर दिया है. पहले आए दिन कश्मीर घाटी में जो आतंकी घटनाएं होती थीं उन पर लगाम लगा है और अब वहां के लोग विकास के एक नए रास्ते पर निकल पड़े हैं. सूबे में अमन-चैन स्थापित होने के बाद साल 2024 में वहां पर विधानसभा चुनाव भी बेहद शांतिपूर्ण ढंग से हुए जो अभूतपूर्व और प्रशंसनीय था. शायद ही किसी ने पहले सोचा हो कि कभी अमित शाह जैसा नेता आएगा और जम्मू-कश्मीर से कांग्रेस पार्टी के सरपरस्त आतंक के आकाओं का सफाया करके वहां आमजन का राज स्थापित कर देगा.

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