IAS Anupama Jorwal  : वो ऑफिसर जिसने गृहिणी मां के ख्वाब को किया पूरा, आज हर बच्चे को शिक्षा देने के सपने को दे रही हैं धार

IAS Series : जयपुर स्थित शिक्षा संकुल, E ब्लॉक का द्वितीय तल, कमरा नंबर 306. ये दफ्तर है IAS अनुपमा जोरवाल का, जो सर्व शिक्षा अभियान की राज्य परियोजना निदेशक हैं. इसके साथ ही वह स्कूली शिक्षा की कमिश्नर भी हैं. ये कमरा शिक्षा संकुल के बाकी कमरो से इसलिए खास है क्यूंकि यही से तय होता है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा स्कूली शिक्षा से वंचित नहीं रहे. हर बच्चे के हाथ में किताब हो और हर किसी को शिक्षा का समान अधिकार मिले. ये सारा दारोमदार है आईएएस अनुपमा जोरवाल के कंधों पर जो सर्व शिक्षा अभियान को सफल बनाने में जुटी हुई हैं. आज इनका जन्मदिन है. इस खास मौके पर ‘द कलंदर पोस्ट’ की सीरीज ‘IAS’ में हम बताएंगे कि हर किसी को आईएएस अनुपमा जोरवाल की कहानी जानना क्यों जरूरी है?

तारीख 26 मार्च 1980. जयपुर में एक दंपत्ति एचएम मीणा-संतोष देवी के घर अनुपमा का जन्म हुआ. पिता पीडब्ल्यूडी में सेक्शन इंजीनियर थे और मां गृहिणी. संतोष देवी को घर संभालने के साथ ही सदैव इस बात का भान रहा कि वह बच्चों को अच्छे संस्कार और परवरिश दें ताकि वे बड़े अफसर बनकर देश की सेवा कर सकें. इसलिए उन्होंने बच्चों को बेहतरीन संस्कार तो दिए ही, इसके साथ ही उन्हें पढ़ाई के भी समान अवसर दिए. वह जानती थी कि बेटी को भी अगर सही मार्गदर्शन और पढ़ाई का मौका मिला तो वह जरूर परिवार का नाम रौशन करेगी. अनुपमा और भाई अभिषेक दोनों शुरू से ही पढ़ने में होशियार थे और देशसेवा का जज्बा दोनों के मन में बसता था. और यही से उनके मन में शुरू हुआ यूपीएससी के प्रति प्रेम.

भाई-बहन ने एक ही साथ फोड़ डाला UPSC

दोनों भाई-बहन ने यूपीएससी की तैयारी शुरू की. लेकिन इसी बीच अनुपमा की शादी यूपी कैडर के आईपीएस अखिलेश कुमार से हो गई. शादी के बाद यूपीएससी की तैयारी जारी रखना अनुपमा के लिए काफी मुश्किल था लेकिन इन्होंने अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया. इसमें उनके पति का भी काफी बड़ा योगदान रहा जिन्होंने अनुपमा को दिन-रात तैयारी के लिए प्रेरित किया. समय बीता और परीक्षा पूरी हो गई. पति से मिले सपोर्ट और मेहनत का ही नतीजा रहा कि साल 2011 में इन्होंने यूपीएससी फोड़ दिया और बन गई IAS. खास बात यह है कि इसी साल इनके भाई अभिषेक ने भी यूपीएसएसी क्लियर किया और हरियाणा कैडर के आईपीएस ऑफिसर बन गए. एक ही बार में दोनों का ऑफिसर बनना परिवार के लिए किसी सपने से कम नहीं था.

अनुपमा की कार्यकुशलता को देखकर सरकार ने सौंपी ये महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां

2011 बैच की राजस्थान कैडर की आईएएस अनुपमा ने अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत बतौर सहायक कलेक्टर अलवर से शुरू की. इसके बाद वह बांसवाड़ा, जैसलमेर, सिरोही और प्रतापगढ़ जैसे जिलों की कलेक्टर रहीं. इस दौरान इनकी प्रशासनिक कुशलता सामने आई और इनके काम को काफी ज्यादा सराहा गया. इनकी कार्यकुशलता का ही नतीजा था कि सरकार ने इन्हें एक के बाद एक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाां सौंपी. आईएएस अनुपमा जोरवाल राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन और पर्यटन विभाग में भी प्रबंध निदेशक का महत्वपूर्ण जिम्मा निभा चुकी हैं. अभी सर्व शिक्षा अभियान की राज्य परियोजना निदेशक एवं स्कूली शिक्षा की आयुक्त के तौर पर अपनी सेवाएं दे रही हैं.

काम के तनाव को कभी व्यक्तित्व पर नहीं होने देती हावी

अनुपमा का काम करने का तरीका ऐसा है कि वह दफ्तर का समय पूरा हो जाने के बाद भी एकाग्रचित होकर देर रात तक फाइलों को निपटाती है. कभी भी इनके व्यवहार में काम का दबाव नहीं झलकता. इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां कंधे पर होने के बाद भी बातचीत में कभी भी इनके चेहरे पर कोई तनाव नजर नहीं आता. इनका मिलनसार और खुशमिजाज व्यक्तित्व दफ्तर के अधीनस्थों को भी काम करने को प्रेरित करता है. इनके इस व्यवहार से दफ्तर मिलने आने वाली आम जनता भी काफी ज्यादा प्रभावित होती है.

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