Birthday Special : खेल में जो स्थान मेजर ध्यानचंद का है, संगीत में जो स्थान लता मंगेशकर का है कुछ ऐसा ही ओहदा सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों में निशांत जैन का है. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि साल 2013 में यूपीएससी परीक्षा के सिलेबस में हुए बड़े बदलाव के बाद हिंदी माध्यम से अब तक की सबसे अच्छी रैंक इनकी ही है. इन्होंने 2014 में सिविल सेवा परीक्षा में हिंदी माध्यम से पहली और ऑल इंडिया तेरहवीं रैंक लाकर सबको चौंका दिया था. निशांत ने साबित कर दिया कि अगर मेहनत में दम हो तो भाषा कभी बाधा नहीं बन सकती. वे ‘रुक जाना नहीं’, ‘मुझे बनना है यूपीएससी टॉपर’ जैसी किताबों के लेखक हैं. किताबें पढ़ने और ढेर सारी यात्राएं करने के शौकीन निशांत एक बेहतरीन मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं जिनसे लाखों UPSC एस्पिरेंस्ट्स प्रेरणा पा रहे हैं.
आज 2015 बैच के राजस्थान कैडर के IAS ऑफिसर निशांत जैन का जन्मदिन है. अधिकारी होने के साथ-साथ वे बेहद मिलनसार, हंसमुख और मानवीय व्यक्तित्व के धनी हैं. वर्तमान में निशांत जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के सचिव हैं. इससे पहले वे बाड़मेर और जालौर जिले के कलेक्टर रह चुके हैं. इसके अलावा निशांत ने अजमेर विकास प्राधिकरण में कमिश्नर और राजस्थान पर्यटन विभाग में डायरेक्टर के तौर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं.

हिंदी को ताकत बनाकर तय किया क्लर्क से कलेक्टर तक का सफर
निशांत जैन का जन्म 30 अक्टूबर 1986 को मेरठ के साधारण परिवार में हुआ. ये एक छोटी सी जगह में मिडिल क्लास ज्वॉइंट फैमिली में रहते थे. बचपन से ही पढ़ाई में बहुत ब्राइट थे. हर क्लास में इनके अंक बहुत अच्छे आते थे. यही नहीं, कक्षा 12वीं में निशांत ने जिला टॉप किया था पर अपने सपने को लेकर क्लियर निशांत ने यूपीएससी की राह पर चलने के लिए ह्यूमैनिटीज़ का चुनाव किया. इनका मानना था कि अपना खर्चा खुद उठाना चाहिए. इसलिए ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद इन्होंने नौकरी के लिए कई जगह आवेदन किया और उन्हें नौकरी मिल गई.
निशांत की पहली नौकरी डाक विभाग में क्लर्क के पद पर लगी. लेकिन सिविल सेवा की तैयारी में अड़चन आने के कारण इन्होंने नौकरी छोड़ दी। इन्होंने ठान लिया था कि चाहें जो हो जाए, आईएएस ही बनना है. हिंदी मीडियम के निशांत जैन के लिए यूपीएससी का यह सफर आसान नहीं था पर इन्होंने हिंदी को हमेशा अपनी ताकत समझा. सरकारी नौकरी छोड़ने के बाद निशांत ने हिंदी साहित्य से मास्टर्स कंप्लीट किया और यूजीसी की परीक्षा में JRF क्लियर किया। इसके बाद यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी में जुट गए। स्कूली पढ़ाई हिंदी भाषा से हुई इसलिए उन्होंने यूपीएससी परीक्षा भी हिंदी में ही दी। यूपीएससी के प्रथम प्रयास में इन्हें सफलता नहीं मिली। पहले प्रयास के असफल होने के बाद वह तैयारी करते रहे और दूसरी बाद बैठे। इस बार इन्होंने हिंदी माध्यम में प्रथम व ओवरऑल इंडिया 13वीं रैंक लाकर इतिहास रच दिया। इस तरह इन्होंने सबको बता दिया कि सपनों की कोई भाषा नहीं होती, कुछ पाने के लिए बस मेहनत ही काफी है.
असफलताओं के बावजूद नहीं मानी हार
निशांत कहते हैं कि उन्हें बचपन से पढ़ाई और एक्सट्राक्यूरीकुलर एक्टीविटीज़ दोनों में टॉप करने की आदत थी. ऐसे में जब यूपीएससी के पहले प्रयास और साथ ही में उसी साल दिए यूपी पीसीएस के पहले अटेम्पट, दोनों में वे असफल हुए तो यह हार बर्दाशत नहीं कर पाए. इस समय वे काफी निराश हो गए थे. लेकिन निशांत ने हार नहीं मानी जैसा कि वे कहते हैं कि उनका पसंदीदा गीत है रुक जाना नहीं, तू कहीं हार के…. इसी की तर्ज पर उन्होंने कभी जीवन में रुकना नहीं सीखा. चाहे जो भी हालात हों, वे निरंतर प्रयास करते रहे और दूसरे प्रयास में सिविल सेवा में हिंदी मीडियम से टॉप कर इतिहास रच दिया.

अपने काम के दम पर अक्सर रहते हैं सुर्खियों में
वर्ष 2018 में अप्रैल से दिसम्बर तक निशांत जैन ने माउंट आबू (सिरोही) में उपखण्ड अधिकारी के रूप में सेवाएं दी. उसके बाद वे कई अहम पदों पर रहे। कलेक्टर के रूप में उनकी महत्पूर्ण यात्रा की शुरुआत जालोर जिले से हुई. इसके बाद वे बाड़मेर जिले में भी कलेक्टर रहे. इस दौरान वह अपने नवाचारों के चलते लगातार सुर्खियों में बने रहे. कलेक्टर बनने से पहले जैन राजस्थान पर्यटन विभाग में निदेशक की भूमिका निभा चुके हैं। इस पद पर रहते हुए उन्होंने राजस्थान दिवस पर पूरे प्रदेश में बेहतरीन कार्यक्रमों का आयोजन कर बड़ी छाप छोड़ी है। वे जहां भी जिन पदों पर रहे, वहां के लोग आज भी उनके द्वारा किए गए कामों की सराहना करते हैं.
कवि दुष्यंत कुमार के हैं बहुत बड़े फैन
आईएएस निशांत जैन का यूपीएससी में वैकल्पिक विषय हिंदी साहित्य था. यही वजह है कि हिंदी के लगभग सभी कवियों की पंक्तियां उन्हें जुबानी याद रहती हैं. वह हिंदी कवि दुष्यंत कुमार के बहुत बड़े फैन हैं। दुष्यंत की पंक्तियों ने उन्हें अपने संघर्ष के दिनों में काफी हिम्मत और हौंसला दिया है. उनका मानना है कि दुष्यंत कुमार को पढ़ने वाले स्टूडेंट्स कभी निराश नहीं रह सकते। इसलिए उन्हें ज्यादा से ज्यादा पढ़ा जाना चाहिए। आईएएस निशांत जैन अक्सर कहते हैं कि जो युवा अपने लक्ष्य से भटकने लगे और उनको सफलता न मिले. तो ऐसे हालात में सभी युवाओं को दुष्यंत कुमार की पंक्तियों को पढ़ कर प्रेरणा लेनी चाहिए.
प्रतियोगिता में मिली जीत तो कॉलेज के प्राचार्य ने बांटी जलेबी
कॉलेज की यादों को ताजा करते हुए निशांत जैन बताते हैं कि जब वह मेरठ कॉलेज में अध्ययन कर रहे थे. तब एक कॉम्पटीशन में उनकी टीम ने जीत हासिल की थी.जब वह जीत की ट्रॉफी के साथ अपने प्रिंसिपल डॉ एसके अग्रवाल के पास लेकर पहुंचे तो प्रिंसिपल डॉ. एसके अग्रवाल ने पूरे कॉलेज में खुशी से जलेबी बटवा दी. इससे निशांत को प्रेरणा मिली की सफलता कोई छोटी या बड़ी नहीं होती. जीवन में छोटी-छोटी खुशियों को भी हमेशा इंजॉय करना चाहिए जिससे जीवन में आगे बढ़ने का हौंसला मिलता है.

खुद टॉपर बन किताब से युवाओं को कर रहे प्रेरित
एक समय ऐसा भी था जब निशांत के दोस्त और रिश्तेदार उनके आईएएस बनने के लक्ष्य के बारे में सुनकर हंसते थे। उसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और परीक्षा पास कर कामयाबी हासिल की। लेकिन वह खुद को कामयाब बनाने तक ही नहीं रुके, उनका लक्ष्य था कि कोई भी हिंदी मीडियम का एस्पिरेंट्स हीन भावना के कारण परीक्षा में सफल होने से नहीं रुकना चाहिए. इसलिए उन्होंने ‘रुक जाना नहीं’, ‘मुझे बनना है यूपीएससी टॉपर’ जैसी किताबें लिखीं जो आज हिंदी माध्यम से तैयारी करने वाले युवाओं के बीच काफी पॉपुलर हैं. इन किताबों के जरिए वे यूपीएससी में सफल होने के बारीक गुण सीखकर सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं.