मोदी सरकार के दौरान देश में नक्सलवाद लगातार कमजोर हुआ है और बड़ी संख्या में भटके हुए युवा हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। सरकार के ताजा आंकड़े बताते हैं कि उग्र वामपंथ (नक्सलवाद) पर निर्णायक नियंत्रण की दिशा में भारत ने बड़ी सफलता हासिल की है।
सरकार के मुताबिक, साल 2016 में देश के 126 जिले नक्सल प्रभावित थे, लेकिन केंद्र सरकार के लगातार प्रयासों की वजह से अब यह संख्या घटकर सिर्फ 8 जिले रह गई है। इनमें से भी केवल 3 जिले ऐसे हैं जहां नक्सल समस्या ज्यादा गंभीर मानी जाती है।
नक्सल हिंसा में ऐतिहासिक गिरावट
लोकसभा में एक सवाल के जवाब में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि साल 2010 में नक्सल हिंसा की 1936 घटनाएं दर्ज की गई थीं। लेकिन 2025 में यह संख्या घटकर सिर्फ 234 रह गई, यानी करीब 88 फीसदी की गिरावट।
इतना ही नहीं, नक्सल हिंसा में नागरिकों और सुरक्षाबलों की मौतों में भी भारी कमी आई है।
- 2010 में जहां 1005 मौतें हुई थीं
- वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 100 रह गई
यह बदलाव साफ दिखाता है कि सरकार की नीति जमीन पर असर दिखा रही है।
बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण
सरकारी आंकड़ों के अनुसार साल 2025 में
- 1022 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया
- जबकि 2337 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया
सरकार के मुताबिक, 2019 के बाद यह नक्सलियों का सबसे बड़ा समर्पण है। यह इस बात का संकेत है कि अब नक्सली संगठन कमजोर पड़ रहे हैं और उनके कैडर भविष्य को लेकर नए रास्ते तलाश रहे हैं।

आत्मसमर्पण करने वालों को सरकार दे रही नई जिंदगी
बीजेपी सांसद रमेश अवस्थी और कमलजीत सहरावत के सवाल पर सरकार ने बताया कि नक्सलियों के पुनर्वास के लिए एक मजबूत नीति लागू की गई है।
गृह राज्य मंत्री ने बताया कि 2015 में ‘उग्र वामपंथ से निपटने के लिए राष्ट्रीय नीति एवं कार्य योजना’ लागू की गई थी। इसके तहत सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE) योजना के माध्यम से अब तक 3681 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राज्यों को दी जा चुकी है।
आत्मसमर्पण पर कितना पैसा देती है सरकार?
सरकार की आत्मसमर्पण सह पुनर्वास नीति के तहत-
- उच्च रैंक वाले नक्सलियों को 5 लाख रुपये
- अन्य नक्सली कैडरों को 2.5 लाख रुपये तुरंत दिए जाते हैं
इसके अलावा
- हथियार और गोला-बारूद के साथ आत्मसमर्पण पर अलग प्रोत्साहन राशि
- तीन साल तक हर महीने 10,000 रुपये का वजीफा
- पसंदीदा काम या व्यवसाय के लिए प्रशिक्षण की सुविधा
राज्य सरकारें भी अपनी-अपनी पुनर्वास नीतियां लागू करती हैं।
नक्सल इलाकों में पहुंचा विकास
सरकार ने साफ किया कि केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि विकास को भी नक्सलवाद के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बनाया गया है।
नक्सल प्रभावित इलाकों में अब तक—
- 15,016 किलोमीटर सड़कें बनाई गईं
- 9,233 मोबाइल टॉवर लगाए गए
- 46 आईटीआई और 49 कौशल विकास केंद्र खोले गए
इससे इन इलाकों में रोजगार, शिक्षा और संचार की स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है।
नक्सल मुक्त भारत की ओर बढ़ता देश
सरकार का दावा है कि 2015 की राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना के चलते नक्सलवाद पर मजबूत अंकुश लगा है। दिसंबर 2025 तक नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या घटकर सिर्फ 8 रह जाना इसका सबसे बड़ा प्रमाण है।
सरकार ने दोहराया है कि 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सल मुक्त बनाने के लक्ष्य की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
हिंसा की जगह विकास, डर की जगह भरोसा और बंदूक की जगह भविष्य — यही मोदी सरकार की नक्सल नीति की सबसे बड़ी पहचान बनती जा रही है।