जानिए कौन हैं गोल्ड मेडलिस्ट IPS हेमंत कलाल, दौसा के नए एडिशनल एसपी

पिता की किराना दुकान, स्कूली शिक्षा गांव में, कई नौकरियां छोड़ पहले ही प्रयास में बने आईपीएस अधिकारी

जिला डूंगरपुर, राजस्थान का एक छोटा सा गांव जिसका नाम है दामड़ी. पिता मोहनलाल की एक छोटी सी परचून की दुकान. मां गृहणी. ग्रामीण परिवेश के ज्यादातर बच्चों की तरह हेमंत कलाल की प्रारंभिक पढ़ाई भी गांव में होती है. कक्षा सात में उदयपुर के स्कूल में दाखिला दिलवाया जाता है. हेमंत कलाल ने अहमदाबाद यूनिवर्सिटी से बीटेक किया. इसी समय इन्होंने यूपीएससी क्रेक करने की जिद पाल ली. यूपी में आबकारी इंस्पेक्टर बनते हैं. लेकिन धुन के पक्के हेमंत कलाल प्रशासनिक सेवा परीक्षा की तैयारी करते रहे और RAS बने. सफर थमा नहीं. महज तीन महीने बाद ही UPSC का परीक्षा परिणाम आता है और उतीर्ण छात्रों की सूची में एक नाम इनका भी होता है. बिना कोचिंग के अपने पहले ही प्रयास में UPSC पास करना इनकी जिद और ईमानदार मेहनत का ही नतीजा था.

शतरंज के खेल में माहिर कलाल ने जीते हैं कई अवार्ड, गोल्ड भी कर चुके अपने नाम

आईपीएस हेमंत कलाल अपने छात्र जीवन से ही शतरंज के खेल में माहिर रहे हैं. इन्होंने जिला और स्टेट लेवल कॉम्पिटिशन में कई मैडल जीते हैं. लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी मसूरी में ट्रेनिंग के दौरान शतरंज टूर्नामेंट में इन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम किया तो सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस एकेडमी की विजेता टीम के कप्तान होने का रिकॉर्ड भी इनके नाम है.

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